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उम्मीदें कमज़ोर कर देती है....

🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃 एक बादशाह सर्दियों की शाम जब अपने महल में दाखिल हो रहा था तो एक बूढ़े दरबान को देखा जो महल के सदर दरवाज़े पर पुरानी और बारीक वर्दी में पहरा दे रहा था।  बादशाह ने उसके करीब अपनी सवारी को रुकवाया और उस बूढ़े दरबान से पूछने लगा ; "सर्दी नही लग रही ?" दरबान ने जवाब दिया "बोहत लग रही है हुज़ूर ! मगर क्या करूँ, गर्म वर्दी है नही मेरे पास, इसलिए बर्दाश्त करना पड़ता है।" "मैं अभी महल के अंदर जाकर अपना ही कोई गर्म जोड़ा भेजता हूँ तुम्हे।" दरबान ने खुश होकर बादशाह को फर्शी सलाम किया और आजिज़ी का इज़हार किया।  लेकिन बादशाह जैसे ही महल में दाखिल हुआ, दरबान के साथ किया हुआ वादा भूल गया।  सुबह दरवाज़े पर उस बूढ़े दरबान की अकड़ी हुई लाश मिली और करीब ही मिट्टी पर उसकी उंगलियों से लिखी गई ये तहरीर भी ; "बादशाह सलामत ! मैं कई सालों से सर्दियों में इसी नाज़ुक वर्दी में दरबानी कर रहा था, मगर कल रात आप के गर्म लिबास के वादे ने मेरी जान निकाल दी।" सहारे इंसान को खोखला कर देते है और उम्मीदें कमज़ोर कर देती है।  अपनी ताकत के बल पर जीना शुरू कीजिए, ...

What's up व्रत कथा

.                What's up व्रत कथा एक सुंदर 🏢🏬🏣🏤 शहर था। वहाँ एक सुंदर स्त्री 👩🏻‍🦰रहती थी वह घरेलू परेशानियों से तंग और बच्चों की शिक्षा को लेकर बहुत परेशान रहती थी परंतु कड़ी मेहनत करती थी 🙋 जिम्मेदारी का बोझ, अकेलेपन से बीमार पड़ गई थी। बीपी, शुगर ने शरीर में धर कर लिया था और हंसी, खुशी, आनंद सब गायब हो गया था। फिर एक दिन एक सहेली ने उसे स्मार्टफोन उपहार में दिया। उसने व्हाट्सएप से दोस्तों के साथ संवाद करना शुरू कर दिया। कुछ ही दिनों में उसकी सारी रिपोर्ट सामान्य आ गई। बैठे बैठे बी.पी. शक्कर सब नार्मल होने लगी वह आनंद से व्हाट्सएप व्रत की सफलता की कहानी सबको बताने लगी।   उसकी एक सहेली थी, उसने कहा मुझे भी बताओ, यह व्रत कैसे किया जाता है और इसके करने से क्या फल मिलता है। मैं भी यह व्रत करूंगी। महिला ने कहा, हर सुबह उठने के साथ इस भगवान के दर्शन कर जीएम (Good Morning), जीएन (Good Night) का समय-समय पर जाप करना चाहिए। समय- ⏱ समय पर भगवान के दर्शन कर मन को शुद्ध करें। एक ग्रुप के व्हाट्सएप मैसेज को पूरी भक्ति भावना से दूसरे ग्रुप में अर...

आखिर अंतर रह ही गया !

आखिर अंतर रह ही गया ! 🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔 1) बचपन में जब हम रेल की सवारी  करते थे, माँ घर से खाना बनाकर ले जाती थी, पर रेल में कुछ लोगों को जब खाना खरीद कर खाते देखते, तब बड़ा मन करता था कि हम भी खरीद कर खाएँ!  पिताजी ने समझाया- ये हमारे बस का नहीं! ये तो अमीर लोग हैं जो इस तरह पैसे खर्च कर सकते हैं, हम नहीं!                    बड़े होकर देखा, जब हम खाना खरीद कर खा रहे हैं, तो "स्वास्थ सचेतन के लिए", वो लोग घर का भोजन ले जा रहे हैं...🙃 आखिर अंतर रह ही गया...😒 🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐🧐 2) बचपन में जब हम सूती कपड़े पहनते थे, तब वो लोग टेरीलीन पहनते थे! बड़ा मन करता था, पर पिताजी कहते- हम इतना खर्च नहीं कर सकते!                 बड़े होकर जब हम टेरीलीन पहने लगे, तब वो लोग सूती कपड़े पहनने लगे! सूती कपड़े महँगे हो गए! हम अब उतने खर्च नहीं कर सकते थे!   आखिर अंतर रह ही गया... 😒🤔 ⚖⚖⚖⚖⚖⚖⚖ 3) बचपन में जब खेलते-खेलते हमारा पतलून घुटनों के पास से फट जाता, माँ बड़ी कारीगरी से उसे रफू कर देती, और ह...

I Won’t Go To The Temple Again...

I Won’t Go To The Temple Again... Very interesting, read till the end 🤗 A daughter went to her father and said...   “I won't be going to temple anymore..” The father said: “may I ask why?” She said: “when I go there All I see is people on their mobile phones during service & bhajan, some are gossiping, some just are not living with integrity, they are all just hypocrites...” Father became silent, and then said: “OK... can I ask you to do something for me before you make your final decision?” She said: “Yes.. what's that?” He said: “Plz take a glass of water and walk around the temple 2 times; but you mustn’t let any water fall out the glass.” She said: “yes... I can definitely do that.” Then...  She came back and said  “it's done and here is the Glass Of Water” He asked her 3 questions: 1.  Did you see anybody on their phone?  2. Did you see anybody gossiping?  3. Was anybody living without Integrity? She Said: “How could I have seen anyone else?....

लोग हैं ......

तू अपनी खूबियां ढूंढ, कमियां निकालने के लिए                                     लोग हैं| अगर रखना ही है कदम तो आगे रख, पीछे खींचने के लिए                                      लोग हैं| सपने देखने ही है तो ऊंचे देख, निचा दिखाने के लिए                                      लोग हैं| अपने अंदर जुनून की चिंगारी भड़का, जलने के लिए                                      लोग हैं| अगर बनानी है तो यादें बना, बातें बनाने के लिए                                      लोग हैं| प्यार करना है तो खुद से कर, दुश्मनी करने के लिए      ...

Fresh Fish.....Satisfaction is death...

The Japanese have a great liking for fresh fish.  But the waters close to Japan have not held many fish for decades.  So, to feed the Japanese population, fishing boats got bigger and went farther than ever. The farther the fishermen went, the longer it took to bring back the fish.  The longer it took them to bring back the fish, the stale they grew. The fish were not fresh and the Japanese did not like the taste.  To solve this problem, fishing companies installed the freezers on their boats.  They would catch the fish and freeze them at sea.  Freezers allowed the boats to go farther and stay longer. However, the Japanese could taste the difference between fresh and frozen fish.  And they did not like the taste of frozen fish.  The frozen fish brought a lower price.  So, fishing companies installed fish tanks.  They would catch the fish and stuff them in the tanks, fin to fin.  After a little hashing around, fishes stopped moving....

दर्द कागज़ पर मेरा बिकता रहा...

दर्द कागज़ पर मेरा बिकता रहा मैं बैचैन था रातभर लिखता रहा.... छू रहे थे सब बुलंदियाँ आसमान की मैं सितारों के बीच, चाँद की तरह छिपता रहा.... दरख़्त होता तो, कब का टूट गया होता मैं था नाज़...