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भूख लगे तो रोटी की जात नहीं पूछा करते - Salil Saroj

भूख लगे तो रोटी की जात नहीं पूछा करते .... पेट को लगेगी बुरी,ये बात नहीं पूछा करते .... ये धरती बिछौना ,ये आसमाँ है शामिआना.... बेघरों से बारहाँ दिन -रात नहीं पूछा करते .... मालूम है कि एक भी पूरी नहीं हो पाएगी.... बेटियों से उनके जज्बात नहीं पूछा करते .... क्यों बना है बेकसी का ये आलम कौम में.... सरकार से ऐसे सवालात नहीं पूछा करते .... जिन उँगलियों में कालिख लगा दी गई हो.... उनसे फिर कलम-दवात नहीं पूछा करते .... जो दोस्त चला गया कमाने, गांव छोड़ के.... कब होगी अब मुलाक़ात नहीं पूछा करते .... वो टूट जाएगा बताते बताते हाल अपना.... ऐसे इश्क़ की शुरुआत नहीं पूछा करते .... सलिल सरोज

रिश्ते नहीं छोड़ा करते - गुलज़ार की ग़ज़ल

हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते ... वक़्त की शाख़ से लम्हें नहीं तोड़ा करते ... जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकन ... ऐसी तस्वीर के टुकड़े नहीं जोड़ा करते .... शहद जीने का मिला करता है थोड़ा थोड़ा .... जाने वालों के लिये दिल नहीं थोड़ा करते .... लग के साहिल से जो बहता है उसे बहने दो .... ऐसी दरिया का कभी रुख़ नहीं मोड़ा करते....