● हम वो आखरी पीढ़ी हैं - जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं, जमीन पर बैठ कर खाना खाया है, प्लेट में चाय पी है। ● हम वो आखरी लोग हैं - जिन्होंने बचपन में मोहल्ले के मैदानों में अपने दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे जैसे खेल खेले हैं। ● हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं - जिन्होंने कम या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और नावेल पढ़े हैं। ● हम वही पीढ़ी के लोग हैं - जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये हैं। ● हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं - जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही बचपन गुज़ारा है। ● हम वो आखरी लोग हैं - जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का ज्यादा तेल लगा कर, स्कूल और शादियों में जाया करते थे। ● हम वो आखरी पीढ़ी के लोग हैं - जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी, किताबें, कपडे और हाथ काले, नीले किये है। ● हम वो आखरी लोग हैं - जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है। ● हम वो आखरी लोग हैं - जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को ...
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