कभी रो कर समझौता कर लिया... तो कभी हंस कर ख्वाहिशों को मार गए... लोग समझते रहें, हमें कद्र नहीं रिश्तों की... और हम रिश्ते बचाते-बचाते ख़ुद से ही हार गए....
तू अपनी खूबियां ढूंढ .... कमियां निकालने के लिए लोग हैं | अगर रखना ही है कदम.... तो आगे रख , पीछे खींचने के लिए लोग हैं | सपने देखने ही है ..... तो ऊंचे देख , निचा दिखाने के लिए लोग हैं | अपने अं...
मुझे लगता था हम कभी थक नहीं सकते लेकिन पता नहीं क्यूँ अब थक गए हैं, ईश जिंदगी से अपने अंदर मौजूद हर एहसास से, टूटे हुए ख्वाब ओर ख्वाहिशो से हर रिश्ते से, हर बार टूटे विस्वास से ओर अपने वजूद से भी पता नहीं क्यूँ पर अब शायद कभी किसी को वैसे नहीं मिलेंगे, जैसे हम थे
क्या लगता है मैंने एक दिन खुद से पूछा, पूछा कि क्या सच में आदमी मर्द होता है.. फिर मैंने महसूस किया, हर वो शख़्स जो पैसा कमाना जानता है, दुनिया की नज़र में उसकी हैसियत, औकात कुछ अलग रही.... चाहे वो कोई भी रहा हो .... तब जाके ये बात में ठीक ठीक पता लगा कि आदमी मर्द नहीं होता, पैसा मर्द होता है..😑
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