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दर्द कागज़ पर मेरा बिकता रहा...

दर्द कागज़ पर मेरा बिकता रहा मैं बैचैन था रातभर लिखता रहा.... छू रहे थे सब बुलंदियाँ आसमान की मैं सितारों के बीच, चाँद की तरह छिपता रहा.... दरख़्त होता तो, कब का टूट गया होता मैं था नाज़...

पौधा लगाओ पानी बचाओ , कहता सब संसार....

धूप सिपाही बन गई , सूरज थानेदार ! गरम हवाएं बन गईं , जुल्मी साहूकार !! : शीतलता शरमा रही , कर घूँघट की ओट ! मुरझाई सी छांव है , पड़ रही लू की चोट !! : चढ़ी दुपहरी हो गया , कर्फ़्यू जैसा हाल ! घर ...

खुदा भी याद आता है ज़रूरत पे यहां सबको...

दरवाज़ों पे खाली तख्तियां अच्छी नहीं लगती, मुझे उजड़ी हुई ये बस्तियां अच्छी नहीं लगती, चलती तो समंदर का भी सीना चीर सकती थीं, यूँ साहिल पे ठहरी कश्तियां अच्छी नहीं लगती, खुद...

ये इंसा है केवल चमन देखता है ....

ये इंसा है केवल चमन देखता है सरे राह बेपर्दा तन देखता है .... हवस का पूजारी हुआ जा रहा है कली में भी कमसिन बदन देखता है .... ज़लालत की हद से गिरा इतना नीचे कि मय्यत पे बेहतर कफन देखता है ...

मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा....

मैं हर बार गिरा और सम्भलता रहा, दौर खुदा की रहमतों का चलता रहा, वक़्त भले ही मेरे विपरीत था, मैं ना जरा सा भी भयभीत था, मुझे यकीं था की एक दिन सूरज जरूर निकलेगा, क्या हुआ जो वो हर रो...

क्योंकि मेरी कोई जायदाद नहीं।

तन्हा बैठा था एक दिन मैं अपने मकान में, चिड़िया बना रही थी घोंसला रोशनदान में। पल भर में आती पल भर में जाती थी वो, छोटे छोटे तिनके चोंच में भर लाती थी वो। बना रही थी वो अपना घर एक ...

भागी हुई लड़कियों का बाप!

भागी हुई लड़कियों का बाप!       वह इस दुनिया का सबसे अधिक टूटा हुआ व्यक्ति होता है। पहले तो वह महीनों तक घर से निकलता नहीं है, और फिर जब निकलता है तो हमेशा सर झुका कर चलता है। अपन...