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दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले ...

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दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले ज़िन्दगी राम का बनवास नहीं थी पहले .... हम भी सो जाते थे मासूम फरिश्तों की तरह और ये रात भी हस्सास नहीं थी पहले ..... तेरी फुरक़त ही उदासी का सबब है अबके तेरी क़ुरबत भी हमें रास नहीं थी पहले.....

भगवान भी किसी औरत के चरित्र को बता क्यों नही सकते ?

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  एक जवान औरत कुएं के पास पानी भर रही थी तभी एक आदमी वहाँ पहुँचा। उस आदमी ने औरत से थोड़ा पानी पिलाने के लिए कहा खुशी से उस औरत ने उसे पानी पिलाया। पानी पीने के बाद उस आदमी ने औरत से पूछा कि क्या आप मुझे बता सकती हैं की भगवान भी किसी औरत के चरित्र को बता क्यों नही सकते? इतना कहने पर वह औरत जोर जोर से चिल्लाने लगी बचाओ... बचाओ... उसकी आवाज सुनकर गांव के लोग कुए की तरह दौड़ने लगे तो उस आदमी ने कहा कि आप ऐसा क्यों कर रही है, तो उस औरत ने कहा ताकि गांव वाले आए और आपको खूब पीटें और इतना पीटे की आपके होश ठिकाने लग जाए। यह बात सुनकर उस आदमी ने कहा मुझे माफ करें, मैं तो आपको एक भली और इज्ज़तदार औरत समझ रहा था। तभी उस औरत ने कुएं के पास रखा मटके का सारा पानी अपने शरीर पर डाल लिया और अपने शरीर को पूरी तरह भींगा डाला।  इतने देर में गांव वाले भी कुएं के पास पहुंच गए। गांव वालों ने उस औरत से पूछा कि क्या हुआ ? औरत ने कहा मैं कुएं में गिर गई थी इस भले आदमी ने मुझको बचा लिया। यदि यह आदमी यहां नही रहता तो आज मेरी जान चली जाती। गांव वालों ने उस आदमी की बहुत तारीफ की और उसको कंधों पर उठा लिया। उ...

कभी-कभी तेरी आवाज़ पर रुकूं भी नहीं ...

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  कभी-कभी तेरी आवाज़ पर रुकूं भी नहीं ... कि तू पुकारे मुझे और मैं सुनूं भी नहीं !! इस इन्तेज़ार में ज़िद का भी एक पहलू है .... किवाड़ खोल दूं और रास्ता तकूं भी नहीं !! वो दूर हो तो लगे उस से कोई रिश्ता है .... क़रीब आए तो मैं उसका कुछ लगूं भी नहीं !!

मैं सुलग रहा हूं बुझा नहीं ...

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  कहीं मन्दिरों में दिया नहीं, कहीं मस्जिदों में दुआ नहीं .. मेरे शह्र में हैं ख़ुदा बहोत हैं, मगर आदमी का पता नहीं ।। कहीं यूं न हो, तेरे हाथ में, मैं हवा से मिल के भड़क उठूं ... अभी खेल मत मेरी राख से, मैं सुलग रहा हूं बुझा नहीं ...

दूसरा फ़ैसला नहीं होता ...

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  दूसरा फ़ैसला नहीं होता ... इश्क़ में मशवरा नहीं होता .... ख़ुद ही सौ रास्ते निकलते हैं .... जब कोई रास्ता नहीं होता .... जब तलक रू-ब-रू न हो कोई .... आइना आइना नहीं होता ... अपना समझा तो कह दिया वर्ना ... ग़ैर से तो गिला नहीं होता ....

दुनियां में हवस की भुख कुछ यूं जगी है...

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  दुनियां में हवस की भुख कुछ यूं जगी है... मैंने कहा बहन है वो मेरी लोगों ने पूछा क्या सगी है...

उन यादों का क्या और उन वादों का क्या ?

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  उन यादों का क्या और उन वादों का क्या ? उन रस्मों का क्या और उन कसमों का क्या ? तेरे जाने के बाद हम पर जो हादसें गुजरें ! उन लम्हा लम्हा दरकते अहसासों का क्या ?