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खैर सबकुछ ठीक ही है...

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  मन खाली सा हो गया है...कुछ भी ठहरता नहीं बहुत देर तक... गुस्सा जितनी जल्दी आता है उतना ही जल्दी शांत भी हो जाता है... रोना कुछ देर का ही है फिर "सब ठीक है" ...कहकर चीजें हटा दी जाती है, दिल और दिमाग से... कहने को बहुत से लोग हैं साथ पर अकेलापन ज्यादा सुखद लगता है अब...  नहीं पता समझदारी घर कर चुकी है या बेवकूफी कर रहा हूं आजकल... फॉर्मल चीजें ,जो करनी भी जरूरी है वो भी नहीं करता..  किसी जान पहचान वाले को देखकर छुप जाने का मन करता है इसलिये नहीं कि वो बात करेगा, चंद सवालात करेगा इसलिये कि अब बातें ही शुरू नहीं करना चाहता शुरू से मैं..   लगता है जो छूट गया सो छूट गया...जो है सो है... नहीं है तो भी कोई गम नहीं और है भी तो क्या पता कल न हो... कुछ सपने जो कभी देखे थे अब जिम्मेदारी से महसूस होते हैं और जिम्मेदारियां एक वक्त के बाद बोझिल होने लगती है... ना खुद से ना दुनिया से कोई शिकायत रही ना ही उन लोगों से कोई शिकवा है जिन्होंने इन आँखो को आँसू दिये... माफ किया ये तो नहीं कह सकता बस अब फर्क नहीं पड़ता कि किसने क्या दिया  खैर सबकुछ ठीक ही है...

हमें यह नहीं पता कि क्या ढ़कना है और क्या खुला रखना है ...??

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  हमें यह नहीं पता कि क्या ढ़कना है और क्या खुला रखना है ...?? हम भारतवासियों को कवर चढ़ाने का बहुत शौक है...।। बाज़ार से बहुत सुंदर सोफा खरीदेंगे लेकिन फिर उसे सफेद जाली के कवर से ढक देंगे |🤔 बढ़िया रंग का सुंदर सूटकेस खरीदेंगे, फिर उस पर मिलिट्री रंग का कपड़ा चढ़ा देंगे |🤔 मखमल की रजाई पर फूल वाले फर्द का कवर!🤔 फ्रिज पर कवर!🤔 माइक्रोवेव पर कवर!🤔 वाशिंग मशीन पर कवर!🤔 मिक्सी पर कवर!🤔 थर्मस वाली बोतल पर कवर!🤔 TV पर कवर!🤔 कार पर कवर!🤔 कार की कवर्ड सीट पर एक और कवर!🤔 स्टेयरिंग पर कवर!🤔 गियर पर कवर!🤔 फुट मैट पर एक ओर कवर!🤔 सुंदर शीशे वाली डाइनिंग टेबल पर प्लास्टिक का कवर!🤔 स्टूल कवर!🤔 चेयर कवर!🤔 मोबाइल कवर!🤔 बेडशीट के ऊपर बेड कवर!🤔 गैस के सिलिंडर पर कवर!🤔 RO पर कवर!🤔 किताबों पर कवर!🤔 . काली कमाई पर कवर!🤔 गलत हरकतों पर कवर!🤔 बुरी नियत पर कवर!🤔 लेकिन.......... . कचरे के डिब्बे पर ढक्कन नदारद!!😁 खुली नालियों के कवर नदारद!!😁 कमोड पर ढक्कन नदारद!!😁 मैनहोल के ढक्कन नदारद!!😁 सर से हेलमेट नदारद!!😁 खुले खाने पर से कवर नदारद!!😁 आधुनिकता में तन से कपडे नदारद!!😁 इंसानों ...

कर्मो का लेख...

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बेटा बन कर,बेटी बनकर, दामाद बनकर,और बहु  बनकर कौन आता है ?  जिसका तुम्हारे साथ कर्मों का लेना देना होता है। लेना देना नहीं होगा तो नहीं आयेगा। एक फौजी था। उसके मां बाप नहीं थे। शादी नहीं की, ,भाई नहीं, बहन नहीं, अकेला ही कमा कमा के फौज में जमा करता जा रहा था।  थोड़े दिन में एक सेठ जी जो फौज में माल सप्लाई करते थे उनसे उनका परिचय हो गया और दोस्ती हो गई । सेठ जी ने कहा जो तुम्हारे पास पैसा है वो उतने के उतने ही पड़ा हैं ।तुम मुझे दे दो मैं कारोबार में लगा दूं तो पैसे से पैसा बढ़ जायेगा इसलिए तुम मुझे दे दो। फौजी ने सेठ जी को पैसा दे दिया। सेठ जी ने कारोबार में लगा दिया। कारोबार उनका चमक गया, खूब कमाई होने लगी कारोबार बढ़ गया। थोड़े ही दिन में लड़ाई छिड़ गई। लड़ाई में फौजी घोड़ी पर चढ़कर लड़ने गया। घोड़ी इतनी बदतमीज थी कि जितनी ज़ोर- ज़ोर से लगाम खींचे उतनी ही तेज़ भागे। खीेंचते खींचते उसके गल्फर तक कट गये लेकिन वो दौड़कर दुश्मनों के गोल घेरे में जाकर खड़ी हो गई। दुश्मनों के साथ संघर्ष में जवान शहीद हो गया घोड़ी भी मर गई। अब सेठ जी को मालूम हुआ कि फौजी नही रहा, तो सेठ जी बहुत खुश हुए कि उस...

बुजुर्गों का सम्मान...

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,छोटे ने कहा," भैया, दादी कई बार कह चुकी हैं कभी मुझे भी अपने साथ होटल ले जाया करो."* गौरव बोला, " ले तो जायें पर चार लोगों के खाने पर कितना खर्च होगा.  याद है, पिछली बार जब हम तीनों ने डिनर लिया था, तब सोलह सौ का बिल आया था.  हमारे पास अब इतने पैसे कहाँ बचे हैं. " पिंकी ने बताया," मेरे पास पाकेटमनी के कुछ पैसे बचे हुए हैं."  तीनों ने मिलकर तय किया कि इस बार दादी को भी लेकर चलेंगे,  इस बार मँहगी पनीर की सब्जी की जगह मिक्सवैज मँगवायेंगे और आइसक्रीम भी नहीं खायेंगे. छोटू, गौरव और पिंकी तीनों दादी के कमरे में गये और बोले, "दादी इस' संडे को लंच बाहर लेंगे, चलोगी हमारे साथ." दादी ने खुश होकर कहा," तुम ले चलोगे अपने साथ."  "हाँ दादी " संडे को दादी सुबह से ही बहुत खुश थी.  आज उन्होंने अपना सबसे बढिया वाला सूट पहना, हल्का सा मेकअप किया, बालों को एक नये ढंग से बाँधा. आँखों पर सुनहरे फ्रेमवाला नया चश्मा लगाया. यह चश्मा उनका मँझला बेटा बनवाकर दे गया था जब वह पिछली बार लंदन से आया था.  किन्तु वह उसे पहनती नहीं थी, कहती थी, इतना सुन्दर...

बचपन की दुनिया

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  एक ऐसी पोस्ट, जिसकी पहली लाइन पढ़ते ही आप खुद इसके मुख्य पात्र हो जाएंगे।❤️ ** बचपन में स्कूल के दिनों में क्लास के दौरान टीचर द्वारा पेन माँगते ही हम बच्चों के बीच राकेट गति से गिरते पड़ते सबसे पहले उनकी टेबल तक पहुँच कर पेन देने की अघोषित प्रतियोगिता होती थी। जब कभी मैम किसी बच्चे को क्लास में कापी वितरण में अपनी मदद करने पास बुला ले, तो मैडम की सहायता करने वाला बच्चा अकड़ के साथ "अजीमो शाह शहंशाह" बना क्लास में घूम-घूम कर कापियाँ बाँटता और बाकी के बच्चें मुँह उतारे गरीब प्रजा की तरह अपनी चेयर से न हिलने की बाध्यता लिए बैठे रहते। 🙄 उस मासूम सी उम्र में उपलब्धियों के मायने कितने अलग होते थे टीचर ने क्लास में सभी बच्चो के बीच गर हमें हमारे नाम से पुकार लिया .....टीचर ने अपना रजिस्टर स्टाफ रूम में रखकर आने  का बोल दिया तो समझो कैबिनेट मिनिस्टरी में चयन का गर्व होता था। 😁 आज भी याद है जब बहुत छोटे थे, तब बाज़ार या किसी समारोह में हमारी टीचर दिख जाए तो भीड़ की आड़ ले छिप जाते थे। जाने क्यों, किसी भी सार्वजनिक जगह पर टीचर को देख हम छिप जाते थे ?       ...

4 पैसे क्यों ज़रूरी हैं ?

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बचपन में बुजुर्गों से एक कहानी सुनते थे कि... इंसान 4 पैसे कमाने के लिए मेहनत करता है या... बेटा कुछ काम करोगे तो 4 पैसे घर में आएँगे या... आज चार पैसे होते तो कोई ऐसे ना बोलता, आख़िर क्यों चाहिए ये चार पैसे और चार ही क्यों तीन या पाँच क्यों नहीं?❓ तीन पैसों में क्या कमी हो जायेगी या पांच से क्या बढ़ जायेगा?❓ आइये...   समझते हैं कि इन चार पैसों का क्या करना है? पहला पैसा भोजन है, दूसरे पैसे से पिछला कर्ज़ उतारना है, तीसरे पैसे का  आगे क़र्ज़ देना है और चौथे पैसे को कुएं में डालना है। 4 पैसों का रहस्य 1) भोजन:- अर्थात अपना तथा अपने परिवार पत्नी, बच्चों का भरण-पोषण करना, पेट भरने के लिए। 2) पिछला क़र्ज़ उतारना:- अपने माता-पिता की सेवा के लिए उनके द्वारा किए गये हमारे पालन-पोषण कर्ज़ उतारने के लिए। 3) आगे कर्ज़ देना:- सन्तान को पढ़ा-लिखा कर क़ाबिल बनाने के लिए ताकि आगे वृद्धावस्था में वे आपका ख़्याल रख सकें। 4) कुएं में डालने के लिए:- अर्थात शुभ कार्य करने के लिए दान, सन्त सेवा, असहायों की सहायता करने के लिए, यानि निष्काम सेवा करना, क्योंकि हमारे द्वारा किए गये इन्हीं शुभ क...

छोले पूड़ी सी नमकीन हलवे सी मीठी यादें...

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  "तेरे पास कितने रुपये इकठ्ठे हुए" "19" हैं?????? 😲 "तो मेरे पास 18 कैसे हैं".... 😧 कौनसी आंटी ने नहीं बुलाया मुझे???? मन में ये सवाल पूरा दिन खनकता था उन सिक्कों की तरह... 50 पैसे, 1 रुपैया और किस्मत रईस होती तो वो 2 रुपए का गुलाबी सा नोट... अगर नई नवेली गड्डी में से कड़कता नोट मिल जाता तो ख़ुशी युँ होती जैसे 100 रुपये का सौदा कर लाएंगे इससे....और कहीं लाल सुनहरी चुन्नी, प्लेट, मिल जाती तो हम देवी की तरह पूजी जाने कंजिकाओं को वो आंटी खुद "देवी" से कम न लगती थी... 👣🙏 सिक्कों का ये हिसाब किताब सुलझता नहीं कि कहीं से आवाज़ आ जाती आओ "कन्या " जल्दी आ जाओ.. और मन में एक और सिक्का बढ़ जाने की ख़ुशी फिर से पंख फैला लेती... 😄 पेट चने पूड़ी हलवे से ऐसा भरा हुआ के एक चना भी खाया तो पेट फूट जाए और न खायें तो रुपैया छूट जाए... 😉 "आंटी हम दोनों एक में ही खा लेंगे" कह कर दिल और पेट का वजन एडजस्ट करने की कोशिश कर लेते थे.... 😉 वो दो दिन बस हमारे होते थे "सिर्फ हमारे" आज सिक्के बड़े नोट और गिफ्ट बन गए पर "कंजक और कंजिकाओं का ...