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बस इसी का नाम ज़िन्दगी है ....

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कुछ दबी हुई ख़्वाहिशें है, कुछ मंद मुस्कुराहटें... कुछ खोए हुए सपने है, कुछ अनसुनी आहटें... कुछ दर्द भरे लम्हे है, कुछ सुकून भरे लम्हात... कुछ थमे हुए तूफ़ाँ हैं, कुछ मद्धम सी बरसात... कुछ अनकहे अल्फ़ाज़ हैं, कुछ नासमझ इशारे... कुछ ऐसे मंझधार हैं, जिनके मिलते नहीं किनारे... कुछ उलझनें है राहों में, कुछ कोशिशें बेहिसाब.... बस इसी का नाम ज़िन्दगी है चलते रहिये, जनाब...

ऐ मेरे दोस्त तू आँसू बहाता क्यों है....

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ऐ मेरे दोस्त तू आँसू बहाता क्यों है,  जहाँ तेरी कद्र ना हो उस गली जाता क्यों है?   तू खुद ही ज़िम्मेदार है अपनी रुसवाई का,  आखिर ग़ैरों की बातों में आता क्यों है?  कड़वा ही सही मगर सच बोलना सीख,  बेमतलब यूं बहाने बनाता क्यों है?  तू तो कहता है कि तू हमदर्द है मेरा,   मदद करके फिर एहसान जताता क्यों है?  जब ग़म-ए-मोहब्बत से परहेज़ ही करना है,  तो ख़ामख़ाह किसी से दिल लगाता क्यों है?  इन्हें तो बस मज़ा लेने में मज़ा आता है,  ज़माने भर को अपने ज़ख्म दिखाता क्यों है?  अरे कुछ तो सबक लिया कर अपनी गलतियों से,  हर बार वही गलतियां दौहराता क्यों है?  ये लोग जलते हैं तुझे ख़ुश होता देखकर,  यूं बेवजह मुस्कुराकर इन्हें जलाता क्यों है?

मैंने कल एक झलक जिंदगी को देखा....

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🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂 मैंने कल एक झलक जिंदगी को देखा, वो मेरी राह में गुनगुना रही थी ...  मैं ढूंढ़ रहा था उसे इधर उधर, वो ऑंख मिचोली कर मुस्कुरा रही थी ...  एक अरसे के बाद आया मुझे करार, वो थपकी दे मुझे सुला रही थी ...  हम दोनों क्यों ख़फा हैं एक दुसरे से, मैं उसे और वो मुझे बता रही थी ... मैंने पुछा तूने मुझे इतना दर्द क्यों दिया ?  उसने कहाँ मैं जिंदगी हू ... "तुजे जीना सीखा रही थी" 🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂

मनुष्य है ही ऐसा.....

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मनुष्य है ही ऐसा..      लक्ष्य भी है, मंज़र भी है, चुभता मुश्किलों का, खंज़र भी है !!      प्यास भी है, आस भी है, ख्वाबो का उलझा, एहसास भी है !!     रहता भी है, सहता भी है, बनकर दरिया सा, बहता भी है!!     पाता भी है, खोता भी है, लिपट लिपट कर फिर, रोता भी है !!     थकता भी है, चलता भी है, मोम सा दुखों में, पिघलता भी है !!     गिरता भी है, संभलता भी है, सपने फिर से नए, बुनता भी है !!         मनुष्य है ही ऐसा..

जिंदगी क्या है......

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कभी तानों में कटेगी, कभी तारीफों में; ये जिंदगी है यारों, पल पल घटेगी !! पाने को कुछ नहीं, ले जाने को कुछ नहीं; फिर भी क्यों चिंता करते हो, इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी, ये जिंदगी है यारों पल-पल घटेगी! बार बार रफू करता रहता हूँ, ..जिन्दगी की जेब !! कम्बखत फिर भी, निकल जाते हैं..., खुशियों के कुछ लम्हें !! ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही... ख़्वाहिशों का है !! ना तो किसी को गम चाहिए, ना ही किसी को कम चाहिए !! खटखटाते रहिए दरवाजा... एक दूसरे के मन का; मुलाकातें ना सही, आहटें आती रहनी चाहिए !! उड़ जाएंगे एक दिन ... तस्वीर से रंगों की तरह ! हम वक्त की टहनी पर..... बेठे हैं परिंदों की तरह !! बोली बता देती है,इंसान कैसा है! बहस बता देती है, ज्ञान कैसा है! घमण्ड बता देता है, कितना पैसा है। संस्कार बता देते है, परिवार कैसा है !! ना राज़ है... "ज़िन्दगी", ना नाराज़ है... "ज़िन्दगी"; बस जो है, वो आज है, ज़िन्दगी! जीवन की किताबों पर, बेशक नया कवर चढ़ाइये; पर...बिखरे पन्नों को, पहले प्यार से चिपकाइये !!

'भारत' में रहकर 'भारत' को गाली देने वाले कुत्तों के लिए समर्पित कहानी....

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एक बादशाह अपने कुत्ते के साथ नाव में यात्रा कर रहा था। उस नाव में अन्य यात्रियों के साथ एक दार्शनिक भी था। कुत्ते ने कभी नौका में सफर नहीं किया था, इसलिए वह अपने को सहज महसूस नहीं कर पा रहा था। वह उछल-कूद कर रहा था और किसी को चैन से नहीं बैठने दे रहा था। मल्लाह उसकी उछल-कूद से परेशान था कि ऐसी स्थिति में यात्रियों की हड़बड़ाहट से नाव डूब जाएगी। वह भी डूबेगा और दूसरों को भी ले डूबेगा। परन्तु कुत्ता अपने स्वभाव के कारण उछल-कूद में लगा था। ऐसी स्थिति देखकर बादशाह भी गुस्से में था, पर कुत्ते को सुधारने का कोई उपाय उन्हें समझ में नहीं आ रहा था। नाव में बैठे दार्शनिक से रहा नहीं गया। वह बादशाह के पास गया और बोला : "सरकार। अगर आप इजाजत दें तो मैं इस कुत्ते को भीगी बिल्ली बना सकता हूँ।"  बादशाह ने तत्काल अनुमति दे दी। दार्शनिक ने दो यात्रियों का सहारा लिया और उस कुत्ते को नाव से उठाकर नदी में फेंक दिया।  कुत्ता तैरता हुआ नाव के खूंटे को पकड़ने लगा। उसको अब अपनी जान के लाले पड़ रहे थे। कुछ देर बाद दार्शनिक ने उसे खींचकर नाव में चढ़ा लिया। वह कुत्ता चुपके से जाकर एक कोने मे...

चाय सिर्फ़ चाय ही नहीं होती...

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चाय सिर्फ़ चाय ही नहीं होती... ✍🏻 जब कोई पूछता है "चाय पियेंगे" तो बस नहीं पूछता वो तुमसे दूध, चीनी और चायपत्ती को उबालकर बनी हुई  एक कप चाय के लिए।✍🏻 वो पूछता हैं... क्या आप बांटना चाहेंगे कुछ चीनी सी मीठी यादें कुछ चायपत्ती सी कड़वी दुःख भरी बातें..!✍🏻 वो पूछता है.. क्या आप चाहेंगे बाँटना मुझसे अपने कुछ अनुभव, मुझसे कुछ आशाएं कुछ नयी उम्मीदें..?✍🏻 उस एक प्याली चाय के साथ वो बाँटना चाहता है अपनी जिंदगी के वो पल तुमसे जो अनकही है अबतक दास्ताँ जो अनसुनी है अबतक✍🏻 वो कहना चाहता है.. तुमसे तमाम किस्से जो सुना नहीं पाया  अपनों को कभी..✍🏻 एक प्याली चाय के साथ को अपने उन टूटे और खत्म हुए ख्वाबों को एक बार और  जी लेना चाहता है।✍🏻 वो उस गर्म चाय की प्याली  के साथ उठते हुए धुओँ के साथ कुछ पल को अपनी सारी फ़िक्र उड़ा देना चाहता है ✍🏻 इस दो कप चाय के साथ  शायद इतनी बातें दो अजनबी कर लेते हैं जितनी तो अपनों के बीच भी नहीं हो पाती।✍🏻 तो बस जब पूछे कोई अगली बार तुमसे  "चाय पियेंगे..?" ✍🏻 तो हाँ कहकर  बाँट लेना उसके साथ अपनी चीनी सी मीठी यादें और च...